Wednesday, July 22, 2009

एक शाम शहीदों के नाम

साथियों जन चेतना कला मंच १५ अगस्त की शाम को एक शाम शहीदों के नाम के साथ मनाता आ रहा है। इसके साथ ही १४ अगस्त को कई तरह की प्रतियोगितायों का आयोजन भी करता है। इस साल जो प्रतियोगिता हो रही है।

१- चित्रकला प्रतियोगिता ।
२- सामान्य ज्ञान प्रतियोगिता ।
३- निबंध लेखन प्रतियोगिता ।
इस में भाग लेने के लिया बहुत ही निम्न शुल्क रखा गया है।
१- क्लास १ से ५ तक रुपये ।
२- क्लास ६ से ८ तक ५ रुपये ।
१- क्लास ९ से १२ तक १० रुपये ।

प्रतियोगिता १४ अगस्त को २ बजे दोपहर से कर्मचारी मैदान, आई आई टी, कानपुर में आयोजित की जा रही है।
पंजीकरण की आखरी तारीख १३ अगस्त है।

इन प्रतियोगितायों में भाग लेने के लिए संपर्क करे ।
शहीद भगत सिंह पुस्तकालय
नानकारी, आई आई टी कानपुर
फ़ोन नम्बर - 9936159914 , 9198035422, 9793291033

आज न कोई नारा होगा सिर्फ़ देश बचाना होगा

साधो देखो रे जग बौराना रे साधो ।

देखो रे जग बौराना ॥

साची कहो तो मारन लागे,

झूठी कहो पतियाना

हिंदू कहत है राम हमारा,

मुस्लमान रहमाना

आपस में दोऊ लडै मरत हैं

मरम न कोई जाना ॥

घर घर मंतर देत फिरत हैं,

माया के अभिमाना

पीपर पत्थर पूजन लागे,

तीरथ गए भुलाना ॥

देखो रे जग बौराना....

माला फेरे टोपी पहिरे,

छाप तिलक अनुमाना

कहे कबीर सुनो भाई साधो,

ये सब भरम भुलाना ॥

देखो रे जग बौराना............

...............................................................................................................सहमत

६ दिसम्बर १९९२

राम वनवास से लौटकर जब घर में आए
याद जंगल बहुत आया जो नगर में आए
रक्से दीवानगी जो आँगन में देखा होगा
६ दिसम्बर को राम ने सोचा होगा
इतने दीवाने कहाँ से मेरे घर आए

पाँव सरयू में अभी राम ने धोये भी न थे
की नज़र आए वहाँ खून के धब्बे
पाँव धोये बिना सरयू के किनारे से उठे
राम ये कहते हुए अपने दुआरो से उठे
राजधानी की फजा आई नहीं मुझे रास
६ दिसम्बर को मिला मुझे दूसरा वनवास

..................आज़मी

Sunday, July 19, 2009

१९ जुलाई पेम


साथियों
१९ जुलाई को हम जन चेतना कला मंच के साथी पेम गांव में नाटक का मंचन करने गए। गांव पहुँचने के बाद हम लोगों ने पूरे गांव में जाकर लोगो को बुलाया और उनको बताया की हम लोग उनके गांव में नाटक करने आए है। करीब पूरे गांव में हम लोगो को १ घंटा लगा लोगो को बुलाकर लाने में। हम लोग गीत गाकर लोगों को बुला रहे थे।
उसके बाद हम लोगों ने नाटक का मंचन किया। नाटक के बाद हम लोगो ने जनता से बात की उनको नरेगा के बारे में बताया, सूचना का अधिकार २००५ के बारे में बात की, १० प्रतिशत लोगो को ही इन सब के बारे में पता था। नाटक के बाद कुछ बातें इस गांव के बारे में जो पता चली वो बहुत ही ग़लत थी, जैसे गांव का प्रधान लोगों की बात नही सुनता, उस गांव में बम्बा से पानी नहीं मिलता, आगे के गांव के लोग बम्बा को बाँध लेते है और इस गांव तक पानी नहीं आने देते है। जब लोग उनसे बात करने जाते है तो मरने की कहते है।
यहाँ पर नाटक करके नए साथियों को मालूम पड़ा की असली नाटक करने में कितनी ताकत लगती है। इस नाटक में मुख्य रूप से गौतम, मोहित, विपिन, हरेंदर, रमन, प्रमोद,सागर, जितेंदर दीनदयाल ने काम किया।




Friday, July 17, 2009

जोगीरा सारा रा... ..रा.....

जोगीरा सारा रा... ..रा.....
जोगीरा सारा रा...रा.....
विश्व बैंक के गेट पे खड़ा है एक इंसान
हमने पूछा कौन तो भईया बोला हिन्दुस्तान
कटोरा लिए खड़ा है
"होए" ,
कटोरा लिए खड़ा है
"होए"
कटोरा लिए खड़ा है
"होए"
कटोरा लिए खड़ा है
बोल...
जोगीरा सारा रा... रा.....
"होए"
जोगीरा सारा रा... रा.....
नई शिक्षा नीतका नया बना मजलूम
पैसे वाले खूब पढ़ेगे जाकर देहरादून
बाकि सब भैस चराए
"होए"
बाकि सब भैस चराए
"होए"
बाकि सब भैस चराए
"होए"
बाकि सब भैस चराए
बोल...
जोगीरा सारा रा... रा.....
"होए"
जोगीरा सारा रा... रा.....
संसद और विधान सभा में चलते जूता चप्पल
नेता जी अब डाकू बन गए देश बन गया चम्बल
सभी को सहना होगा...
"होए"
सभी को सहना होगा...
"होए"
सभी को सहना होगा...
"होए"
सभी को सहना होगा... "होए"
बोल...
जोगीरा सारा रा... रा.....
"होए"
जोगीरा सारा रा... रा.....
संसद की इस रेल का हो गया चक्का जाम
चल चल भइया भाग चले कहीं गंगा जी के धाम
की पंडा गिरी करेगे
"होए"
की पंडा गिरी करेगे
"होए"
की पंडा गिरी करेगे
"होए"
की पंडा गिरी करेगे
बोल...
जोगीरा सारा रा... रा.....
"होए"
जोगीरा सारा रा... रा.....
वकील साहब ने जज से पूछा अपनी कलम दिखाकर
अपराधी गर दोषी हो तो जल्दी से रिहा कर
क्यों की ................
सीएम का साला लगता
"होए"
सीएम का साला लगता
"होए"
सीएम का साला लगता
"होए"
सीएम का साला लगता
बोल...
जोगीरा सारा रा... रा.....
"होए"
जोगीरा सारा रा... रा.....
जोगीरा सारा रा... ॥रा.....
विश्व बैंक के गेट पे खड़ा है एक इंसान
हमने पूछा कौन तो भईया बोला हिन्दुस्तान
कटोरा लिए खड़ा है
"होए" ,
कटोरा लिए खड़ा है
"होए" कटोरा लिए खड़ा है
"होए"
कटोरा लिए खड़ा है
बोल...
जोगीरा सारा रा... रा.....
"होए"
जोगीरा सारा रा... रा.....

Sunday, July 12, 2009

२ जुलाई नुकड़ नाटक गड्ढा

साथियों
जुलाई को जन चेतना कला मंच ने नुक्कड़ नाटक " गड्ढा " का मंचन मंधना में किया। गड्ढा नाटक में एक इंसान गड्ढे में गिर जाता है गड्ढे के पास से बहुत से लोग गुजरते है पैर कोई उसकी मदद नही करता है। सरकारी आदमी , पुलिस, आम जनता, समाज सेवक , यहाँ तक की गड्ढे के ऊपर पटरे रख कर नेता जी का मंच बनाया जाता है जब नेता जी को पता चलता है तो नेता जी कहते है की ये तो समाधान है गड्ढे में गरीब, बेरोजगार, आपने हक़ के लिए लड़ने वाली जनता को गिरा कर उसके ऊपर से मिट्टी गिरवा कर पुरे भारत से गरीबी, बेरोजगारी सब दूर कर देते और भारत को विकसित देश बना देते। पुलिस वाला आता है तो निकलने की जगह उसका चालान कर देता। आम जनता भी उसकी मदद नही करती है। समाज सेवक भी उसकी मदद नही करता है और कहता है की उसको पता है समाज सेवा कंहा, कब, और कैसे करना है। करीब ५० लोगो ने नाटक को देखा

Friday, July 10, 2009

पुरस्कार वितरण समारोह


जन चेतना कला मंच और शहीद भगत सिंह पुस्तकालय की तरफ़ से २ जुलाई को चित्रकला प्रतियोगिता का आयोजन किया गया था । इस प्रतियोगिता के पुरस्कार प्राप्त करने वाले सबसे बेहतरीन नन्हे चित्रकारों को पुरस्कृत किया गया।






चित्रकला प्रतियोगिता


जन चेतना कला मंच और शहीद भगत सिंह पुस्तकालय की तरफ़ से २ जुलाई को चित्रकला प्रतियोगिता आयोजित की गई। जिसमे पच्चीस बच्चों ने भाग लिया और एक से एक अच्छे चित्र बनाये गए। छोटे बच्चों को किसी भी एक फल का चित्र बनने के लिए दिया गया और ६ से ऊपर के बच्चों को कोई भी एक द्रश्य स्वयं विचार कर बनने के लिए दिया गया। बच्चों ने यहाँ भी आपनी सुंदर कला से हमें परिचित कराया।



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Wednesday, April 29, 2009

Mai to likhna chahta tha

Hinsa, danga, aag ki wardat

Kalam ki bagawat to dakho

Likh diya Gugrat

Jinihe hamne chun – chunkar

Bheja tha

We hame Chun – chunkar

Marwa rahe hai

Sareaam jinda jalwa rahe hai

Fir bhi unka dawa hai

Ham, achchi sarkar chla rahe hai …….

‘‘N. R. Gupt’’

sapne

SAPNE

Sapne har kisi ko nahi aate

Bejan barud ke karno mai

Soyi aag ko sapne nahi aate

Badi ke liye uthi huyi

Hathli ki pasine ko sapne nahi aate

Selfo mai pare

Yitihas –granthoi ko sapn nahi aate

Sapno ke liye lajmi hai

Jhelne wale dilo ka hona

sapno ke liye

Nid ki najar honi lajmi hai

Sapne yesliye

Har kisi ko nahi aate…….

“ PASH “

Thursday, April 23, 2009

साथियों जन चेतना कला मंच कानपुर के कुछ युवाओं का ग्रुप है जो की नुक्कड़ नाटकों के जरिये समाज को जाग्रतकरने का काम कर रहा है . यह ग्रुप कई सालों से कानपुर और देश के कई शहरों में जाकर नुक्कड़ नाटक कर चुका है।
"सिर्फ़ हँगामा खड़ा करना हमारा मकसद नहीं हमारी कोशिश है की बुनियाद हिलनी चाहिए"